jagannath puri rath yatra story in hindi

इस लेख में हम उड़ीसा के पूरी में स्थित जगन्नाथ जी का मंदिर न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। Jagannath Puri Rath Yatra story को समझते है, यह हिंदू धर्म के चार धामों में से एक है, और ऐसा माना जाता है कि यहां की यात्रा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जगन्नाथ पुरी में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर है, जहां हर साल लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

इस मंदिर का मुख्य आकर्षण जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा है, जो एक भव्य त्योहार के रूप में मनाई जाती है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ मास की द्वितीया तिथि को शुरू होती है और पुरी के सबसे बड़े उत्सवों में से एक है।

रथ यात्रा के दौरान, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ, तीन विशाल रथों में सवार होकर यात्रा करते हैं। यह यात्रा भक्तों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है, और इसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों लोग आते हैं।

Jagannath Puri Rath Yatra Story

जगन्नाथ पूरी में रथ यात्रा की शुरुआत की बात की जाये तो 12 वी से 16 वी शताब्दी के बिच हुई थी, इसकी बारे में कई कहानिया और मान्यताये है । कुछ लोग कहते है की भगवान विष्णु के अवतार भगवन श्री कृष्ण जी का मंदिर है । इस मंदिर में लाखो भक्त दर्शन करने के लिए आते है। जगन्नाथ पूरी की रथ यात्रा किसी त्यौहार से कम नहीं है इस रथ यात्रा में शामिल होने के लिए देश- विदेश से लोग इसमें हिस्सा लेने के लिए आते है । यहाँ प्रसिध्द धार्मिक त्यौहार भगवान जगन्नाथ उनके भाई बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित है।

jagannath puri rath yatra

रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ के उनकी मौसी के घर ‘ गुंडिचा मंदिर ‘ जाने की कथा से जुडी है, भगवान अपनी बहन और भाई के साथ वह कुछ दिन बिताने जाते है। तीन विशाल रथों पर उनकी मुर्तिया को सजाकर पूरी के सामने से भक्तजन रस्सी खींचकर रथ को खींचते है, जिसे पवित्र और शुभ माना जाता है ।

Jagannath Puri Ratho के नाम

जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा में तीन प्रमुख रथ हैं:

  • नंदीघोष (श्रीजगन्नाथ का रथ)
  • तलध्वज (बलभद्र का रथ)
  • दर्पदलन/पद्म रथ (सुभद्रा का रथ)

Jagannath Puri Rath Yatra मेला महोत्सव

जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे ओडिशा के पुरी में बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष यह पवित्र यात्रा 7 जुलाई से प्रारंभ होकर 16 जुलाई को समाप्त हुई।

रथ यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी:
यह त्यौहार हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को तीन अलग-अलग भव्य रथों में बैठाकर शहर भ्रमण पर ले जाया जाता है।

धार्मिक मान्यता:
भक्तों का मानना ​​है कि रथ खींचने से भगवान का आशीर्वाद मिलता है, जिससे सुख, शांति और समृद्धि आती है।

ऐतिहासिक महत्व:
कहा जाता है कि इस रथ यात्रा की परंपरा 12वीं शताब्दी में शुरू हुई थी। यह यात्रा पुरी के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है।

यह त्यौहार न केवल धार्मिक भावना को व्यक्त करता है बल्कि भगवान और भक्त के बीच के गहरे संबंध को भी दर्शाता है।

Jagannath Puri Raht Yatra क्यों निकली जाती है ?

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा कई कारणों से आयोजित की जाती है, जो धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं से जुड़ी हैं, ऐसा माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा कुछ समय के लिए बीमार पड़ जाते हैं। इस दौरान वे 15 दिनों तक आराम करते हैं और भक्तों को दर्शन नहीं देते। इसके बाद उनकी रथ यात्रा निकाली जाती है।

वेद व्यास जी के अनुसार: एक पौराणिक कथा के अनुसार वेद व्यास जी ने भगवान कृष्ण से सभी भक्तों को दर्शन देने का अनुरोध किया था। इस प्रार्थना के जवाब में भगवान ने रथ यात्रा का प्रावधान किया था।

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Jagannath Puri का रहश्य

जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े कई अद्भुत रहस्य हैं, जो इसे खास और रहस्यमयी बनाते हैं। यहां कुछ प्रमुख रहस्यों का उल्लेख किया गया है:-

1. ध्वज का उल्टा बहना
मंदिर के शीर्ष पर स्थित ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। यह वैज्ञानिक समझ से परे है और इसे दैवीय चमत्कार माना जाता है।

2. सुदर्शन चक्र का रहस्य
मंदिर के शीर्ष पर स्थित सुदर्शन चक्र हमेशा किसी भी स्थान से देखने पर सामने दिखाई देता है, चाहे आप इसे किसी भी कोण से देखें।

3. रसोई की अद्भुत व्यवस्था
मंदिर में महाप्रसाद तैयार करने के लिए 7 बर्तन एक के ऊपर एक रखे जाते हैं। इनके ऊपर रखा भोजन सबसे पहले पकता है, जो सामान्य नियमों के विपरीत है।

4. समुद्र की आवाज का गायब होना
मंदिर के सिंहद्वार (मुख्य प्रवेश द्वार) पर पैर रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज बंद हो जाती है। बाहर आते ही आवाज फिर से सुनाई देने लगती है।

5. महाप्रसाद का चमत्कार
मंदिर में हर दिन एक निश्चित मात्रा में प्रसाद तैयार किया जाता है, लेकिन यह प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता, चाहे कितने भी लोग आएं।

6. रथ का निर्माण
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ हर साल नई लकड़ियों से बनाए जाते हैं। ये लकड़ियाँ पास के जंगल से आती हैं, और इन्हें खोजने का काम एक बहुत ही खास परंपरा के तहत किया जाता है।

7. मूर्ति का रहस्य
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ लकड़ी से बनी हैं और हर 12 से 19 साल में बदल दी जाती हैं। इस प्रक्रिया को नवकालबार कहते हैं और यह गुप्त रूप से किया जाता है।

8. छत पर कोई पक्षी नहीं उड़ता
मंदिर के ऊपर कभी कोई पक्षी नहीं उड़ता, न ही कोई विमान इसके ऊपर से उड़ता है। इसे चमत्कार माना जाता है।

ये रहस्य जगन्नाथ पुरी को न केवल धार्मिक, बल्कि वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अद्वितीय बनाते हैं।

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Jagannath Puri Rath Yatra FAQ

1. रथ यात्रा कब मनाई जाती है?
Ans – यह हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष (जून/जुलाई) की द्वितीया तिथि को शुरू होती है।

2. रथ यात्रा का क्या महत्व है?
Ans – यह भक्तों को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कराने और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देने का प्रतीक है।

3. रथ यात्रा में कितने रथ होते हैं और उनके नाम क्या हैं?
Ans – तीन रथ होते हैं:

  • नंदी घोष: भगवान जगन्नाथ का रथ।
  • ताल ध्वज: बलभद्र का रथ।
  • दर्पदलन या पद्म रथ: देवी सुभद्रा का रथ।

4. गुंडिचा मंदिर का क्या महत्व है?
Ans –  माना जाता है कि गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर है। भगवान अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ 9 दिनों के लिए यहां आते हैं।

5. रथ यात्रा क्यों निकाली जाती है?
Ans – यह यात्रा भगवान जगन्नाथ के भक्तों को दर्शन देने और उनकी भक्ति स्वीकार करने के लिए निकाली जाती है।

6. क्या रथ खींचने का कोई धार्मिक महत्व है?
Ans – हाँ, रथ खींचना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भक्तों के पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें भगवान का आशीर्वाद मिलता है।

7. क्या सभी लोग रथ यात्रा में भाग ले सकते हैं?
Ans – हाँ, इस उत्सव में देश-विदेश से लाखों भक्त भाग लेते हैं।

8. क्या रथ यात्रा केवल पुरी में ही होती है?
Ans – मुख्य रथ यात्रा पुरी में होती है, लेकिन जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन देश-विदेश में कई जगहों पर होता है।

9. रथ कैसे बनते हैं?
Ans – हर साल नई लकड़ी से रथ बनाए जाते हैं। यह काम पारंपरिक कारीगरों द्वारा विशेष अनुष्ठान के साथ किया जाता है।

10. महाप्रसाद का क्या महत्व है?
Ans – को भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। इसे खाने से जीवन में शुभता और शांति आती है।

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