भगवान जगन्नाथ मंदिर का रहस्य bhagwan jagannath mandir ka rahasya

 

 

भगवान जगन्नाथ मंदिर का रहस्य bhagwan jagannath mandir ka rahasya

आज के इस लेख में हम bhagwan jagannath mandir ka rahasya के बारे में हम आपको बताने वाले है, भगवान जगन्नाथ मंदिर को चार धामों में से एक माना जाता है, जो की ओडिसा के तटवर्ती शहर पूरी में स्थित यहाँ विश्व की प्रसिद्ध मंदिर में से एक है, भगवान विष्णु के अवतार में श्री को समर्पित है । यहाँ मंदिर 800 साल से भी ज्यादा पुराना इस पवित्र मंदिर से ऐसे कई रहस्यमी और चमत्कारी बाते है, जो आपको जानने पर मजबूर कर देंगे। आइये जानते है भगवान जगन्नाथ मंदिर के बारे में पूरी जानकारी आगे पढ़े –

bhagwan Jagannath Mandir ka Rahasya

जगन्नाथ पुरी मंदिर भारत के चार धामों में से एक है और इसकी अद्भुत वास्तुकला, धार्मिक महत्व, और रहस्यमयी विशेषताएँ इसे दुनिया भर के श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती हैं। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। इसके रहस्यों को जानना जितना रोचक है, उतना ही अद्भुत भी।

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1. जगन्नाथ पूरी मंदिर चार धाम में से एक है

हाँ, जगन्नाथ पुरी मंदिर भारत के चार धामों में से एक है। चार धाम हिंदू धर्म के चार पवित्र तीर्थ स्थल हैं, जिन्हें भगवान विष्णु और उनके अवतारों से जोड़ा जाता है। ये तीर्थ स्थल भारत के चार दिशाओं में स्थित हैं:

  1. बद्रीनाथ (उत्तर) – उत्तराखंड में स्थित, भगवान विष्णु के बद्रीनारायण रूप को समर्पित।
  2. द्वारका (पश्चिम) – गुजरात में स्थित, भगवान कृष्ण की नगरी।
  3. रामेश्वरम (दक्षिण) – तमिलनाडु में स्थित, भगवान शिव का पवित्र ज्योतिर्लिंग।
  4. जगन्नाथ पुरी (पूर्व) – ओडिशा में स्थित, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित।

जगन्नाथ पुरी का विशेष महत्व

  1. जगन्नाथ पुरी को “पुरी धाम” या “श्रीक्षेत्र” भी कहा जाता है।
  2. यहाँ भगवान विष्णु के जगन्नाथ रूप की पूजा होती है, जो उनकी भक्ति पर आधारित एक अद्वितीय रूप है।
  3. यह चार धाम यात्रा का पूर्वी भाग है और इसे मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
  4. हर साल होने वाली रथ यात्रा इस स्थान को विश्व प्रसिद्ध बनाती है।
  5. चार धामों की यात्रा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है और इसे जीवन में एक बार अवश्य करने की परंपरा है।

2. जगन्नाथ मंदिर दुनिया की सबसे बड़ी रसोई में से एक

हाँ, जगन्नाथ पुरी मंदिर को दुनिया की सबसे बड़ी रसोइयों में से एक माना जाता है। इसे आनंद बाज़ार भी कहा जाता है, जहाँ हर दिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद तैयार किया जाता है।

जगन्नाथ मंदिर की रसोई की विशेषताएँ

मंदिर में मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करके प्रसाद पकाया जाता है। एक बार में 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं और नीचे आग जलाई जाती है। चमत्कार यह है कि सबसे ऊपरी बर्तन का भोजन पहले पकता है और फिर नीचे के बर्तन के भोजन पकते हैं।

प्रसाद को महाप्रसाद कहा जाता है, जिसमें चावल, दाल, सब्ज़ियाँ, और मिठाइयाँ शामिल होती हैं।
इसे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, और सुभद्रा को अर्पित करने के बाद भक्तों के बीच वितरित किया जाता है। महाप्रसाद को खाने से सभी पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

इस रसोई में शामिल लोगो की बात करे तो लगभग 500 से 600 लोग और उनके सहायक हर दिन प्रसाद तैयार करते हैं। यहाँ पर प्रतिदिन 20,000 से 25,000 श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार होता है। त्योहारों और खास अवसरों पर यह संख्या लाखों तक पहुँच जाती है। इसे बनाने और परोसने की पूरी प्रक्रिया बेहद पवित्र मानी जाती है। यह केवल भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए जाने के बाद ही भक्तों को वितरित किया जाता है। जगन्नाथ मंदिर की यह विशाल रसोई न केवल इसकी भव्यता और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाती है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अनूठा उदाहरण भी है।

3. जगन्नाथ मंदिर एक विशाल क्षेत्र को कवर करता है

हाँ, जगन्नाथ मंदिर एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है और इसका परिसर ओडिशा के पुरी शहर के केंद्र में स्थित है। यह मंदिर भारतीय वास्तुकला का एक अद्वितीय उदाहरण में से एक और अपने भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

मंदिर की टोटल क्षेत्रफल की बात करे तो मंदिर का परिसर लगभग 4 लाख वर्ग फुट (37,000 वर्ग मीटर) के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे चारों तरफ से ऊँची दीवारों से घेरा गया है, इस दीवार की ऊँचाई लगभग 20 फीट है। मुख्या मंदिर मुख्य मंदिर की ऊँचाई लगभग 214 फीट है, इसे कलिंग शैली की वास्तुकला में बनाया गया है। मंदिर का शिखर दूर से ही दिखाई देता है।

मंदिर में चार प्रवेश द्वार हैं:

  • सिंह द्वार (मुख्य द्वार, पूर्व दिशा में)।
  • अश्व द्वार (दक्षिण)।
  • हस्ति द्वार (उत्तर)।
  • व्याघ्र द्वार (पश्चिम)।

सिंह द्वार पर जगन्नाथ जी का प्रतीक गरुड़ स्तंभ स्थापित है इस मंदिर परिसर में 120 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर और पूजास्थल स्थित हैं। इन मंदिरों में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हैं, जिनकी पूजा की जाती है।

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4. जगन्नाथ मंदिर के शीर्ष पर सुदर्शन चक्र

जगन्नाथ मंदिर के शीर्ष पर स्थित सुदर्शन चक्र मंदिर की सबसे रहस्यमय और अद्भुत विशेषताओं में से एक है। यह चक्र भगवान विष्णु के प्रमुख प्रतीकों में से एक है और इसे नीलचक्र भी कहा जाता है। सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का दिव्य हथियार है, जिसे भगवान जगन्नाथ के साथ जोड़ा जाता है। इसे जगन्नाथ मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।

भगवान जगन्नाथ मंदिर का रहस्य bhagwan jagannath mandir ka rahasya

यह चक्र मंदिर के मुख्य शिखर (कलश) पर स्थित है। इसका व्यास लगभग 11 फीट है और यह 8 धातुओं (अष्टधातु) से बना हुआ है। सुदर्शन चक्र को किसी भी दिशा से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि यह आपकी ओर मुख किए हुए है। इसे इंजीनियरिंग और वास्तुकला का चमत्कार माना जाता है।

चक्र को इतनी ऊँचाई पर स्थापित करना उस समय की अद्वितीय तकनीकी क्षमताओं का प्रमाण है।
यह चक्र मंदिर की स्थिरता और संतुलन को बनाए रखता है। ऐसा कहा जाता है कि सुदर्शन चक्र चुंबकीय ऊर्जा उत्पन्न करता है, जो मंदिर के वातावरण को सकारात्मक बनाता है। सुदर्शन चक्र को भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यह चक्र मंदिर और पुरी शहर की बुरी शक्तियों से रक्षा करता है। यह चक्र न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय आकर्षण का केंद्र भी है।

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5. जगन्नाथ मंदिर का एक अनोखा ध्वज

जगन्नाथ मंदिर का ध्वज (पताका) मंदिर की एक अनोखी और रहस्यमयी विशेषता है। इसे नीलचक्र ध्वज भी कहा जाता है और यह मंदिर की पवित्रता, शक्ति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।

  • ध्वज भगवान जगन्नाथ के संरक्षण और आशीर्वाद का प्रतीक है।
  • इसे हर दिन बदल दिया जाता है और नया ध्वज मंदिर के शीर्ष पर फहराया जाता है।
  • ध्वज पर चक्र और त्रिशूल जैसे धार्मिक चिह्न अंकित होते हैं। यह ध्वज हमेशा हवा की दिशा के विपरीत लहराता है, जो वैज्ञानिक दृष्टि से समझ पाना कठिन है।
  • इसे भगवान जगन्नाथ की दिव्य शक्ति का प्रमाण माना जाता है।
  • ध्वज मंदिर के नीलचक्र (सुदर्शन चक्र) के ठीक ऊपर बंधा होता है।
  • हर शाम एक पुजारी 450 फीट ऊँचे मंदिर के शिखर पर चढ़कर ध्वज बदलता है।
  • इस कार्य को करने वाले पुजारी का परिवार इसे पीढ़ियों से निभा रहा है।
  • ऐसा माना जाता है कि अगर किसी दिन ध्वज नहीं बदला गया, तो यह अशुभ होगा।

6. जगन्नाथ मंदिर की प्रसिद्ध रथ यात्रा 

जगन्नाथ मंदिर की रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और भव्य त्योहारों में से एक है। यह त्योहार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित है और हर साल ओडिशा के पुरी शहर में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

रथ यात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन अलग-अलग रथ बनाए जाते हैं। ये रथ लकड़ी से तैयार किए जाते हैं और हर साल नए रथ बनाए जाते हैं। यहाँ रथ यात्रा मंदिर से शुरू होकर गुंडिचा मंदिर तक जाती है। गुंडिचा मंदिर भगवान की मौसी का घर माना जाता है। लाखों श्रद्धालु इन रथों को रस्सियों से खींचते हैं, इसे भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे शुभ कार्य माना जाता है।
रथों के नाम हैं:

  • नंदीघोष: भगवान जगन्नाथ का रथ।
  • तालध्वज: बलभद्र का रथ।
  • दर्पदलन: सुभद्रा का रथ।

7. जगन्नाथ मंदिर पक्षियों का ना बैठना 

जगन्नाथ मंदिर के बारे में एक अद्भुत और रहस्यमय तथ्य यह है कि इस मंदिर के ऊपर पक्षी कभी नहीं बैठते और ना ही उड़ते हैं। यह तथ्य वर्षों से वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण से चर्चा का विषय रहा है।

  • ऐसा कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ स्वयं यहाँ निवास करते हैं।
  • मंदिर के ऊपर नीलचक्र और ध्वज के कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है, जहाँ पक्षी बैठने की हिम्मत नहीं करते।
  • यह भगवान की दिव्यता और उनके संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।

इसे भगवान जगन्नाथ की दिव्य उपस्थिति और उनकी शक्ति का प्रमाण माना जाता है। कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि मंदिर की संरचना और इसके ऊपर स्थित नीलचक्र किसी प्रकार का चुंबकीय या विद्युत चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करता है। इस प्रभाव के कारण पक्षी इस क्षेत्र से दूर रहते हैं।

9. भगवान जगन्नाथ का ह्रदय

भगवान जगन्नाथ का हृदय, जिसे ब्रह्म तत्व कहा जाता है, जगन्नाथ मंदिर के सबसे पवित्र और रहस्यमय रहस्यों में से एक है। यह हृदय भगवान का जीवंत तत्व माना जाता है और इसे “अनंत काल तक जीवित” रहने वाला कहा जाता है।

भगवान जगन्नाथ के हृदय का रहस्य

  • यह माना जाता है कि ब्रह्म तत्व भगवान विष्णु की दिव्यता और उनकी अनंत शक्ति का प्रतीक है, इसे भगवान के हृदय के रूप में पूजा जाता है।
  • ब्रह्म तत्व को केवल मंदिर के मुख्य पुजारी ही छू सकते हैं।
  • यहाँ हर 12 से 19 वर्षों के बीच जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को बदलने की प्रक्रिया  होती है, तब ब्रह्म तत्व को नई मूर्तियों में स्थानांतरित किया जाता है।
  • यह प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय होती है और इसे रात में संपन्न किया जाता है।
  • ब्रह्म तत्व को पुरानी मूर्ति से निकालकर नई मूर्ति में रखा जाता है।
  • इस दौरान दैतापति पुजारी आँखों पर पट्टी बांधकर और मंत्रों का जाप करते हुए यह कार्य करते हैं।
  • इस ब्रह्म तत्व का वास्तविक स्वरूप किसी को ज्ञात नहीं है।

कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह एक दिव्य पत्थर, लकड़ी, या कोई अन्य पदार्थ हो सकता है जो भगवान विष्णु के चिह्नों से युक्त है। इसे भगवान जगन्नाथ की आत्मा का प्रतीक माना जाता है। इसे देखना और छूना आम श्रद्धालुओं के लिए सख्त निषेध है।

10. जगन्नाथ पूरी में तीन मूर्ति विराजमान है

जगन्नाथ पूरी मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की तीन मुख्य मूर्तियाँ विराजमान हैं। ये तीनों मूर्तियाँ हिंदू धर्म में अद्वितीय और विशेष स्थान रखती हैं।

तीनों मूर्तियों का महत्व
1. भगवान जगन्नाथ

  • भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु या उनके अवतार श्रीकृष्ण का रूप माना जाता है।
  • उनकी मूर्ति बड़ी आँखों वाली, बिना पैरों और हाथों के स्पष्ट आकार की होती है।
  • यह उनके सर्वव्यापकता और अनंत शक्ति का प्रतीक है।

2. बलभद्र (बलराम)

  • बलभद्र भगवान कृष्ण के बड़े भाई हैं।
  • उनकी मूर्ति सफेद रंग की है, जो शांति और शक्ति का प्रतीक है।
  • कृषि, बल, और भाईचारे के देवता माने जाते हैं।

3. सुभद्रा

  • सुभद्रा भगवान कृष्ण और बलराम की बहन हैं।
  • उनकी मूर्ति पीले रंग की होती है, जो सुख, समृद्धि और प्रेम का प्रतीक है।
  • सुभद्रा भक्तों के लिए सुरक्षा और करुणा का प्रतीक हैं।

जगन्नाथ जीवन के पालनकर्ता के रूप में बलभद्र शक्ति और संकल्प का प्रतीक है और  सुभद्रा सुख और प्रेम का प्रेरणा देती है। ये तीन मूर्तियाँ भगवान जगन्नाथ के परिवार के रूप में भक्तों के बीच प्रेम, सामंजस्य और भक्ति का संदेश देती हैं।

11. पुजारी द्वारा मंदिर के ध्वज को बदलना

जगन्नाथ मंदिर का ध्वज बदलने की प्रक्रिया एक अद्वितीय और महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जिसे प्रत्येक दिन पूजा के दौरान किया जाता है। यह प्रक्रिया न केवल मंदिर के आंतरिक अनुष्ठानों का हिस्सा है, बल्कि इसे भगवान के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है।

ध्वज बदलने की प्रक्रिया मंदिर की शुद्धता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए की जाती है। पुराने ध्वज को उतारने के बाद नया ध्वज फहराया जाता है, ऐसा माना जाता है कि यदि ध्वज सही समय पर नहीं बदला गया, तो यह अशुभ होगा। ध्वज को बदलना भगवान जगन्नाथ की लगातार उपस्थिति और उनकी पवित्रता का प्रतीक है। इसे भगवान की शक्ति और संरक्षण का संकेत माना जाता है।

अंतिम शब्द

जगन्नाथ पुरी मंदिर का रहस्य केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि विज्ञान और संस्कृति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह मंदिर न केवल भगवान जगन्नाथ की उपस्थिति का प्रतीक है, बल्कि कई चमत्कारी घटनाओं और अदृश्य शक्तियों का केंद्र भी है। इन रहस्यों ने इस मंदिर को एक अद्वितीय स्थान बना दिया है, जहाँ लोग विश्वास, भक्ति, और अद्वितीयता की भावना के साथ आते हैं।

Note – दोस्तों यहाँ आर्टिकल आपको कैसे लगी हमें जरूर बताये और हा कोई जानकारी छूट गयी हो तो हमें जरूर कमेंट में बताये।

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